Chapter-Electrostatics | Topic- Properties of Charge

विद्युत स्थैतिकी (Electrostatics) - टॉपर नोट्स
📝

भौतिकी टॉपर हस्तलिखित नोट्स

अध्याय 1: विद्युत स्थैतिकी (Electrostatics) - संपूर्ण नोट्स

🔍
भाग - 1 विषय: परिचय एवं विद्युत आवेश (Electric Charge)
भौतिक विज्ञान (Class 12th)

अध्याय - 1: विद्युत स्थैतिकी (Electrostatics)

🔴 1. विद्युत स्थैतिकी (Electrostatics):-

भौतिकी की वह शाखा जिसके अंतर्गत हम स्थिर आवेशों (Rest Charges) तथा उनके कारण उत्पन्न विद्युत क्षेत्रों, विभव तथा बलों के प्रभावों का अध्ययन करते हैं, उसे विद्युत स्थैतिकी (Electrostatics) कहते हैं।

🔴 2. विद्युत आवेश (Electric Charge):-

विद्युत आवेश किसी पदार्थ या वस्तु का वह आन्तरिक (Intrinsic) गुण है, जिसके कारण वह विद्युत तथा चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न करता है या उनका अनुभव करता है।

📌 इलेक्ट्रॉन सिद्धांत (Electron Theory of Electrification):
किसी भी वस्तु का आवेशन इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण (Transfer of electrons) के कारण होता है। प्रोटॉन नाभिक के अंदर दृढ़ता से बंधे होते हैं, इसलिए आवेशन में केवल इलेक्ट्रॉन भाग लेते हैं।

🔴 3. आवेश के प्रकार (Types of Charges):

① धनावेश (Positive Charge):

जब किसी वस्तु से इलेक्ट्रॉनों की कमी (Deficiency) होती है, तो वह वस्तु धनावेशित हो जाती है।
• उदाहरण: काँच की छड़ को रेशम से रगड़ने पर काँच पर धनावेश।
• धनावेशित वस्तु का द्रव्यमान घट जाता है

② ऋणावेश (Negative Charge):

जब किसी वस्तु में इलेक्ट्रॉनों की अधिकता (Excess) होती है, तो वह वस्तु ऋणावेशित हो जाती है।
• उदाहरण: एबोनाइट की छड़ को फर (Fur) से रगड़ने पर छड़ पर ऋणावेश।
• ऋणावेशित वस्तु का द्रव्यमान बढ़ जाता है

🔴 4. आवेशन की विधियाँ (Methods of Charging):

  • घर्षण द्वारा आवेशन (Charging by Friction): दो उपयुक्त पदार्थों को आपस में रगड़ने पर इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान।
  • चालन/स्पर्श द्वारा आवेशन (Charging by Conduction): किसी अनआवेशित चालक को आवेशित चालक के संपर्क में लाकर आवेशित करना।
  • प्रेरण द्वारा आवेशन (Charging by Induction): बिना किसी भौतिक संपर्क के निकट रखे आवेशित वस्तु द्वारा विपरीत प्रकृति का आवेश उत्पन्न करना।
भाग - 2 विषय: आवेश के 16 मूलभूत गुण (Properties of Charge)

🔴 *. आवेश के गुण (Properties of charge):-

आवेश के निम्नलिखित गुण होते हैं:

(i)
आवेश 2 प्रकार का होता है: ① धनावेश तथा ② ऋणावेश
(ii)
धनावेशित होने पर वस्तु का द्रव्यमान पहले से थोड़ा घट जाता है
ऋणावेशित होने पर वस्तु का द्रव्यमान पहले से थोड़ा बढ़ जाता है
(iii)
आवेश संरक्षित (Conserved) होता है।
(iv)
आवेश क्वांटाइज (Quantized) होता है।
(v)
आवेश हमेशा उदासीन वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करता है।
(vi)
स्थिर आवेश अपने चारों ओर केवल विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है।
(vii)
एक समान वेग से गतिशील आवेश अपने चारों ओर विद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, अर्थात् एक समान वेग से गतिशील आवेश अपने चारों ओर विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
(viii)
त्वरित आवेश या असमान वेग से गतिशील आवेश अपने चारों ओर विद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के साथ-साथ विद्युत चुम्बकीय तरंग भी उत्पन्न करता है, अर्थात् त्वरित आवेश से प्रकाश निकलता है
(ix)
कोई भी आवेश बिना द्रव्यमान नहीं हो सकता है, लेकिन द्रव्यमान बिना आवेश का हो सकता है।
(x)
समान प्रकृति वाले आवेशों के बीच हमेशा विकर्षण बल (Repulsion) कार्य करता है और असमान प्रकृति वाले आवेशों के बीच हमेशा आकर्षण बल (Attraction) कार्य करता है।
(xi)
आवेश Invariant (वेग पर अनिर्भर/अपरिवर्तनीय) होता है।
(xii)
आवेश हमेशा साधारण बीजगणितीय नियम का पालन करता है (Additive property of charge)।
(xiii)
आवेश एक अदिश राशि (Scalar quantity) होता है, जिसका मात्रक कूलम्ब (C) होता है।
(xiv)
किसी वस्तु के आवेशित होने में हमेशा इलेक्ट्रॉन भाग लेता है, प्रोटॉन नहीं।
(xv)
जब किसी पानी के बुलबुले को या गुब्बारे को आवेशित किया जाता है तो विकर्षण बल के कारण उसका त्रिज्या और आकार बढ़ने लगता है

🎨 नोट्स रेखाचित्र प्रदर्शनी (Diagrams 1, 2 & 3)

[चित्र 1: आवेशित बुलबुला / त्रिज्या प्रसार]

विकर्षण के कारण आकार में वृद्धि (Expansion)

[चित्र 2: बाह्य सतह पर आवेश का फैलाव]

धातु के टुकड़े का सारा आवेश बाहरी सतह पर

[चित्र 3: नुकीले भाग पर अधिकतम घनत्व]

नुकीले भाग पर आवेश का घनत्व सबसे अधिक

➜ जब किसी धातु के टुकड़े को आवेशित किया जाता है तो उसका सारा आवेश विद्युत विकर्षण के कारण धातु के बाहरी सतह पर फैल जाता है

➜ जब किसी धातु के प्लेट को आवेशित किया जाता है तो प्लेट के नुकीले भाग पर आवेश का घनत्व सबसे अधिक होता है।

(xvi)
धनावेश का प्रवाह उच्च विभव से निम्न विभव की ओर होता है जबकि ऋणावेश का प्रवाह निम्न विभव से उच्च विभव की ओर होता है।

🔴 Q. आवेश संरक्षण से आप क्या समझते हैं?

Ans:- आवेश को न तो स्वयं उत्पन्न किया जा सकता है और न ही स्वयं नष्ट किया जा सकता है। यह केवल एक पदार्थ से दूसरे पदार्थ में स्थानांतरित हो सकता है इसलिए आवेशन की प्रक्रिया में किसी विलगित निकाय (Isolated system) का कुल आवेश हमेशा नियत रहता है जिसे आवेश का संरक्षण कहा जाता है।

🔴 Q. आवेश के क्वाण्टीकरण से आप क्या समझते हैं?

Ans:- किसी वस्तु पर आवेश इलेक्ट्रॉनों के त्याग और ग्रहण से उत्पन्न होता है।अतः किसी वस्तु पर आवेशों का कुल मान एक इलेक्ट्रॉन के आवेश (e = -1.6 × 10-19 C) के n गुणज के रूप में होगा जहाँ n एक पूर्णांक संख्या है। इसे ही आवेश का क्वांटिकरण कहा जाता है।

→ क्वांटिकरण सिद्धांत के अनुसार किसी वस्तु पर न्यूनतम आवेश का मान qmin = -1.6 × 10-19 C होगा।

भाग - 3 विषय: आवेश और द्रव्यमान में तुलनात्मक अंतर

🔴 Q. आवेश (Charge) और द्रव्यमान (Mass) में अंतर स्पष्ट करें।

Ans: आवेश और द्रव्यमान में निम्नलिखित अंतर पाए जाते हैं -

🔴 विद्युत आवेश (Electric Charge) 🔵 द्रव्यमान (Mass)
1. आवेश धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है। 1. द्रव्यमान हमेशा केवल धनात्मक होता है।
2. आवेशित वस्तुओं के बीच बल आकर्षण तथा विकर्षण दोनों प्रकार का होता है। 2. दो द्रव्यमानों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल केवल आकर्षण प्रकार का होता है।
3. आवेश संरक्षित (Conserved) रहता है। 3. द्रव्यमान संरक्षित नहीं रहता (इसे ऊर्जा में बदला जा सकता है E=mc^2)।
4. आवेश क्वांटाइज (Quantized) होता है। 4. द्रव्यमान का क्वाण्टीकरण अभी तक सिद्ध नहीं हुआ है।
5. आवेश वस्तु के वेग पर निर्भर नहीं करता (Invariant): q_{\text{rest}} = q_{\text{motion}} 5. द्रव्यमान वस्तु के वेग के साथ बढ़ता है: m = \frac{m_0}{\sqrt{1 - v^2/c^2}}
6. बिना द्रव्यमान के आवेश का अस्तित्व संभव नहीं है 6. बिना आवेश के द्रव्यमान का अस्तित्व संभव है (जैसे: न्यूट्रॉन)।

💡 आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत (Relativistic Mass Formula):

\( m = \frac{m_0}{\sqrt{1 - \frac{v^2}{c^2}}} \)

(जहाँ \(m_0\) = विराम द्रव्यमान, \(v\) = कण का वेग, \(c\) = प्रकाश की चाल)

भाग - 4 विषय: कूलम्ब का नियम (Coulomb's Law) & परावैद्युतांक

🔴 *. कूलम्ब का नियम (Coulomb's Law):-

इस नियम के अनुसार, "किन्हीं दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला आकर्षण या विकर्षण बल दोनों आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।"

F F q1 q2 x
\( \therefore F \propto \frac{q_1 \cdot q_2}{x^2} \)
\( \therefore F = \frac{A \cdot q_1 \cdot q_2}{x^2} \)

जहाँ,

\( A = \) कूलाम का नियम (constant) \( = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \)

\( K = \) माध्यम का परावैद्युतांक (Dielectric constant)

\( \epsilon_0 = \) एप्सिलॉन नॉट (Epsilon naught)

\( \therefore F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} \cdot \frac{q_1 \cdot q_2}{x^2} \)
[ \( \frac{1}{4\pi\epsilon_0 K} = 9 \times 10^9 \text{ N}\cdot\text{m}^2/\text{C}^2 \)]

📊 कूलम्ब बल के ग्राफ एवं परावैद्युत प्रभाव (Interactive Graphs)

ग्राफ 1: बल (\(F\)) बनाम दूरी (\(r\)) [\(F \propto \frac{1}{r^2}\)]

ग्राफ 2: बल (\(F\)) बनाम परावैद्युतांक (\(K\)) [\(F \propto \frac{1}{K}\)]

भाग - 5 विषय: Some Important Points

📌 Important Points :-




(i)

\(K\) का मान हमेशा 1 से बड़ा या 1 के बराबर होता है।

i.e., \(K \ge 1\)

(ii)

हवा और निर्वात के लिए \(K=1\) होता है। यदि प्रश्न में माध्यम की चर्चा न हो तो हवा या निर्वात मानकर प्रश्न बनाया जाता है।

(iii)

धातु के लिए \(K = \infty\) (Infinite) होता है।

i.e., \(K = \infty\)

अर्थात् दो आवेशों के बीच पत्तर डाल दिया जाए तो दोनों आवेश एक-दूसरे पर विद्युत बल नहीं लगाता है।

(iv)

दो आवेशों के बीच लगने वाला बल, बल को नियत रखते हुए उनके बीच में \(K\) गुणांक वाला माध्यम डाल दिया जाए तो आवेशों के बीच की दूरी \(\frac{1}{\sqrt{K}}\) गुना कम करना पड़ता है।

\(\therefore x_m = \frac{x_0}{\sqrt{K}}\)

(v)

दो आवेशों के बीच की दूरी नियत रखते हुए आवेशों के बीच में \(K\) गुणांक वाला माध्यम डाल दिया जाए तो उनके बीच लगने वाला विद्युत बल का मान \(\frac{1}{K}\) गुना घट जाता है।

\(\therefore F_m = \frac{F_0}{K}\)

(vi)

एप्सिलॉन नॉट (\(\epsilon_0\)) का S.I. मात्रक \(\text{C}^2/\text{N}\cdot\text{m}^2\) होता है।

\(F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \cdot \frac{q_1 \cdot q_2}{x^2}\)

\(\epsilon_0 = \frac{1}{4\pi} \cdot \frac{q_1 \cdot q_2}{F \cdot x^2} = \frac{\text{C}^2}{\text{N}\cdot\text{m}^2}\)

(vii)

एप्सिलॉन नॉट (\(\epsilon_0\)) को निरपेक्ष विद्युतशीलता या निरपेक्ष परावैद्युतांक कहा जाता है। जिसका मान \(\epsilon_0 = 8.85 \times 10^{-12} \text{ C}^2/\text{N}\cdot\text{m}^2\) होता है।

भाग - 6 विषय: Concept

📌 Concept: एक जैसा गोला हो तो —

q1 q2 x
\( F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \cdot \frac{q_1 \cdot q_2}{x^2} \)

again,

* Repulsion \(\rightarrow F \rightarrow +\)

* Attraction \(\rightarrow F \rightarrow -\)

\( q' = \frac{q_1 + q_2}{2} \quad \text{--- (i)} \)

\( F' = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \cdot \frac{(q')^2}{x^2} \)

\( \therefore \frac{F}{F'} = \frac{q_1 \cdot q_2}{(q')^2} \)

\( \Rightarrow \frac{F'}{F} = \frac{(q')^2}{q_1 \cdot q_2} = \frac{(q_1 + q_2)^2}{4 q_1 \cdot q_2} \)

\( \therefore F' = \frac{F (q_1 + q_2)^2}{4 q_1 \cdot q_2} \)

Note:-

धातु के \(n\) समान गोले पर अलग-अलग आवेश है जिसे आपस में स्पर्श कराकर अलग किया जाए तो सभी गोले पर बराबर आवेश होता है जिसका मान:

\( q = \frac{\text{आवेशों का कुल योगफल}}{n} \)

\( \therefore q = \frac{\sum_{n=1}^{n} q_n}{n} \)