Topic - Unit of Charge | Electrostatics

विद्युत स्थैतिकी (Electrostatics) - Coulomb's Law
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Physics Handwritten Notes (By Pratap Sanjay Sir)

अध्याय 1: विद्युत स्थैतिकी (Electrostatics) - Complete Notes

भाग - 4 विषय: Physics
भौतिक विज्ञान (Physics- 12th)

Topic : आवेश का मात्रक (Unit of Charge)

🔴 Q. आवेश का मात्रक (Unit of Charge) क्या है? इसके विभिन्न मात्रकों को समझाइए।

Ans: आवेश के मुख्य रूप से तीन मात्रक होते हैं:

① S.I. मात्रक ② C.G.S. मात्रक ③ प्रायोगिक मात्रक (Practical Unit)

1 S.I. मात्रक (International System of Units):

आवेश का S.I. मात्रक कूलॉम (Coulomb - C) होता है।

2 C.G.S. मात्रक:

आवेश का C.G.S. मात्रक Stat-Coulomb (st-C) या Electrostatic Unit (esu) होता है। संक्षेप में इसे esu भी कहा जाता है।

3 प्रायोगिक मात्रक (Experimental / Electromagnetic Unit):

आवेश का प्रायोगिक मात्रक 'emu' होता है, जिसका पूरा नाम Electromagnetic Unit (विद्युत चुंबकीय मात्रक) है। इसे Abcoulomb भी कहते हैं।

1 emu (Abcoulomb) = 10 Coulomb

📌 महत्त्वपूर्ण संबंध (Important Relations / Note):

संबंध 1 \( 10 \text{ कूलॉम (C)} = 1\text{ emu} = 3 \times 10^{10}\text{ esu} \)
संबंध 2 \( 1\text{ C} = \frac{1}{10}\text{ emu} = 3 \times 10^9\text{ esu} \)
\( 1\text{ Kilo} = 10^3 \) \( 1\text{ Million} = 10^6 \) \( 1\text{ Billion} = 10^9 \)

* विशिष्ट आवेश :-

एक किलोग्राम इलेक्ट्रॉन में जितना आवेश होगा उसे ही इलेक्ट्रॉन का विशिष्ट आवेश कहते हैं।

$$ \text{विशिष्ट आवेश} = \frac{\text{आवेश}}{\text{द्रव्यमान}} $$
$$\frac{e}{m} = \frac{1.6 \times 10^{-19}}{9.1 \times 10^{-31}}$$
$$\frac{e}{m} = 1.76 \times 10^{11} \text{ } C/kg$$
👉 इलेक्ट्रॉन का आवेश ऋणात्मक होने के कारण signed value:
$$\frac{q}{m} = -1.76 \times 10^{11} \text{ } C/kg$$
$$ \text{इलेक्ट्रॉन विशिष्ट आवेश} = - 1.8 \times 10^{11} \text{ C/kg} $$

1 kg प्रोटॉन में जितना आवेश होता है, उसे ही प्रोटॉन का विशिष्ट आवेश कहते हैं।

$$ \text{प्रोटॉन का विशिष्ट आवेश} = 9.5 \times 10^{7} \text{ C/kg} $$

इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन पर आवेश का परिमाण आपस में बराबर होता है लेकिन उसका विशिष्ट आवेश का परिमाण आपस में बराबर नहीं होता है।

Que. कुलंब के नियम की सीमाएँ को लिखे :-

कुलंब के नियम की निम्नलिखित सीमाएँ होती है:-

यह नियम केवल बिंदु आवेश पर ही लागू होता है। आवेशों के वितरण होने पर यह फेल हो जाता है।


कुलंब का नियम बहुत बड़े दूरी (\(∞\) दूरी) से लेकर छोटे दूरी \(10^{-15}\text{ m}\) तक ही कार्य करता है उससे कम होने पर कुलंब का नियम फेल हो जाता है।

कुलंब का नियम आवेशों के बीच परिवर्तनशील दूरी होने पर लागू नहीं होता हैं।

कुलंब के नियम से परमाणुओं के नाभिक के अंदर उपस्थित आवेश के बीच लगने वाले बलों की व्याख्या नहीं किया जा सकता हैं।

* आवेश घनत्व (Charge density) :-

इकाई space में आवेश की मात्रा को आवेश घनत्व कहा जाता है। यह मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है।

रैखिय आवेश घनत्व
(Linear Charge density)
पृष्ठ आवेश घनत्व
(Surface / Area charge density)
आयतन आवेश घनत्व
(Volume charge density)

रैखिय आवेश घनत्व (Linear charge density):-

किसी आवेशीत तार के इकाई लम्बाई में आवेश की कुल मात्रा को रैखिय आवेश घनत्व कहा जाता है जिसे \( \lambda \) (लैम्ब्डा) से सुचित किया जाता हैं।

$$ \therefore \lambda = \frac{q}{l} $$

\( \lambda \) का SI मात्रक कुलंब प्रति मीटर होता है।

$$ \text{i.e., } \lambda = \text{C/m} \quad \text{OR} \quad \text{C}\cdot\text{m}^{-1} $$

पृष्ठ / क्षेत्रफल आवेश घनत्व (Surface / Area charge density):-

किसी आवेशीत प्लेट के इकाई क्षेत्रफल में आवेश की कुल मात्रा को पृष्ठ आवेश घनत्व कहा जाता है जिसे \( \sigma \) (सिग्मा) से सुचित किया जाता हैं।

$$ \sigma = \frac{q}{A} $$

पृष्ठ आवेश घनत्व का SI मात्रक \( \text{C/m}^{2} \) OR \( \text{C}\cdot\text{m}^{-2} \) होता है।

आयतन आवेश घनत्व (Volume charge density):-

इकाई आयतन में आवेश की कुल मात्रा को आयतन आवेश घनत्व कहा जाता हैं। इसे \( \rho \) (रो) से सूचित किया जाता हैं।

$$ \therefore \rho = \frac{q}{V} $$

आयतन आवेश घनत्व का SI मात्रक \( \text{C/m}^{3} \) OR \( \text{C}\cdot\text{m}^{-3} \) होता हैं।

** विद्युत क्षेत्र :-

किसी आवेश के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ किसी दूसरे आवेश को ले जाने पर वह आकर्षण या विकर्षण बल का अनुभव करता हो तो उसे विद्युत क्षेत्र कहा जाता है। यह एक सदिश राशि होता हैं।

** विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Intensity of Electric field) :-

विद्युत क्षेत्र की किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र का जितना परिमाण होता है उसी के मान को उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता कहा जाता है।

विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु पर रखे इकाई धनावेश पर जितना विद्युत बल कार्य करता है उसी के मान को उस बिंदु पर का विद्युत तिव्रता कहा जाता है जिसे \( E \) से सुचित किया जाता हैं।

q x +1
$$ E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_{0}} \cdot \frac{q \times 1}{x^{2}} $$ $$ \therefore E = \frac{q}{4\pi\varepsilon_{0} x^{2}} $$

* विद्युत क्षेत्र की दिशा (Direction of Electric field):-

विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु पर इकाई धनावेश रख कर मुक्त रूप से छोड़ने पर वह जिस दिशा में गति करने लगता है वह दिशा उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र का दिशा कहलाता है।

धनावेश के कारण विद्युत क्षेत्र की दिशा बाहर की ओर और ऋणावेश के कारण विद्युत क्षेत्र की दिशा अंदर की ओर होता हैं।

⚡ विद्युत क्षेत्र की दिशा (Field Lines Diagram)

+
+q धनावेश (तीर बाहर की ओर) -q ऋणावेश (तीर अंदर की ओर)

📌 Important points :-

\( q \) आवेश के कारण \( x \) दूरी पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मान $$ E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_{0}}.\frac{q}{x^{2}} $$ होता हैं।