Physics Handwritten Notes (By Pratap Sanjay Sir)
अध्याय 1: विद्युत स्थैतिकी (Electrostatics) - Complete Notes
Topic : आवेश का मात्रक (Unit of Charge)
🔴 Q. आवेश का मात्रक (Unit of Charge) क्या है? इसके विभिन्न मात्रकों को समझाइए।
Ans: आवेश के मुख्य रूप से तीन मात्रक होते हैं:
1 S.I. मात्रक (International System of Units):
आवेश का S.I. मात्रक कूलॉम (Coulomb - C) होता है।
2 C.G.S. मात्रक:
आवेश का C.G.S. मात्रक Stat-Coulomb (st-C) या Electrostatic Unit (esu) होता है। संक्षेप में इसे esu भी कहा जाता है।
3 प्रायोगिक मात्रक (Experimental / Electromagnetic Unit):
आवेश का प्रायोगिक मात्रक 'emu' होता है, जिसका पूरा नाम Electromagnetic Unit (विद्युत चुंबकीय मात्रक) है। इसे Abcoulomb भी कहते हैं।
1 emu (Abcoulomb) = 10 Coulomb
📌 महत्त्वपूर्ण संबंध (Important Relations / Note):
* विशिष्ट आवेश :-
एक किलोग्राम इलेक्ट्रॉन में जितना आवेश होगा उसे ही इलेक्ट्रॉन का विशिष्ट आवेश कहते हैं।
→ 1 kg प्रोटॉन में जितना आवेश होता है, उसे ही प्रोटॉन का विशिष्ट आवेश कहते हैं।
→ इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन पर आवेश का परिमाण आपस में बराबर होता है लेकिन उसका विशिष्ट आवेश का परिमाण आपस में बराबर नहीं होता है।
Que. कुलंब के नियम की सीमाएँ को लिखे :-
कुलंब के नियम की निम्नलिखित सीमाएँ होती है:-
① यह नियम केवल बिंदु आवेश पर ही लागू होता है। आवेशों के वितरण होने पर यह फेल हो जाता है।
② कुलंब का नियम बहुत बड़े दूरी (\(\infty\) दूरी) से लेकर छोटे दूरी \(10^{-15}\text{ m}\) तक ही कार्य करता है उससे कम होने पर कुलंब का नियम फेल हो जाता है।
③ कुलंब का नियम आवेशों के बीच परिवर्तनशील दूरी होने पर लागू नहीं होता हैं।
④ कुलंब के नियम से परमाणुओं के नाभिक के अंदर उपस्थित आवेश के बीच लगने वाले बलों की व्याख्या नहीं किया जा सकता हैं।
* आवेश घनत्व (Charge density) :-
इकाई space में आवेश की मात्रा को आवेश घनत्व कहा जाता है। यह मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है।
(Linear Charge density)
(Surface / Area charge density)
(Volume charge density)
① रैखिय आवेश घनत्व (Linear charge density):-
किसी आवेशीत तार के इकाई लम्बाई में आवेश की कुल मात्रा को रैखिय आवेश घनत्व कहा जाता है जिसे \( \lambda \) (लैम्ब्डा) से सुचित किया जाता हैं।
\( \lambda \) का SI मात्रक कुलंब प्रति मीटर होता है।
② पृष्ठ / क्षेत्रफल आवेश घनत्व (Surface / Area charge density):-
किसी आवेशीत प्लेट के इकाई क्षेत्रफल में आवेश की कुल मात्रा को पृष्ठ आवेश घनत्व कहा जाता है जिसे \( \sigma \) (सिग्मा) से सुचित किया जाता हैं।
→ पृष्ठ आवेश घनत्व का SI मात्रक \( \text{C/m}^{2} \) OR \( \text{C}\cdot\text{m}^{-2} \) होता है।
③ आयतन आवेश घनत्व (Volume charge density):-
इकाई आयतन में आवेश की कुल मात्रा को आयतन आवेश घनत्व कहा जाता हैं। इसे \( \rho \) (रो) से सूचित किया जाता हैं।
आयतन आवेश घनत्व का SI मात्रक \( \text{C/m}^{3} \) OR \( \text{C}\cdot\text{m}^{-3} \) होता हैं।
** विद्युत क्षेत्र :-
किसी आवेश के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ किसी दूसरे आवेश को ले जाने पर वह आकर्षण या विकर्षण बल का अनुभव करता हो तो उसे विद्युत क्षेत्र कहा जाता है। यह एक सदिश राशि होता हैं।
** विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Intensity of Electric field) :-
विद्युत क्षेत्र की किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र का जितना परिमाण होता है उसी के मान को उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता कहा जाता है।
विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु पर रखे इकाई धनावेश पर जितना विद्युत बल कार्य करता है उसी के मान को उस बिंदु पर का विद्युत तिव्रता कहा जाता है जिसे \( E \) से सुचित किया जाता हैं।
* विद्युत क्षेत्र की दिशा (Direction of Electric field):-
विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु पर इकाई धनावेश रख कर मुक्त रूप से छोड़ने पर वह जिस दिशा में गति करने लगता है वह दिशा उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र का दिशा कहलाता है।
→ धनावेश के कारण विद्युत क्षेत्र की दिशा बाहर की ओर और ऋणावेश के कारण विद्युत क्षेत्र की दिशा अंदर की ओर होता हैं।
⚡ विद्युत क्षेत्र की दिशा (Field Lines Diagram)
📌 Important Points :-
① \( q \) आवेश के कारण \( x \) दूरी पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मान:
होता हैं।
② \( E \)-तीव्रता वाले विद्युत क्षेत्र में \( q \)-आवेश रखा हो तो उस पर लगने वाला विद्युत बल का मान \( F = q \cdot E \) होता हैं।
निगमन (Derivation) :-
③ धनावेश पर विद्युत क्षेत्र अपने ही दिशा में तथा ऋणावेश पर अपने विपरीत दिशा में विद्युत बल लगाता हैं।
बल \( F \) क्षेत्र \( E \) की दिशा में (Right)
बल \( F \) क्षेत्र \( E \) के विपरीत दिशा में (Left)
④ विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (\( E \)) का S.I मात्रक न्यूटन प्रति कुलंब होता हैं।
⑤ विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (\( E \)) का एक और प्रचलित मात्रक वोल्ट प्रति मीटर होता हैं।
⑥ किसी विद्युत क्षेत्र \( E \) में \( m \) द्रव्यमान तथा \( q \)-आवेश वाला कोई वस्तु रखा हो तो उसका त्वरण \( a = \frac{q \cdot E}{m} \) होता हैं।
⑦ \( m \)-द्रव्यमान और \( q \)-आवेश वाले किसी वस्तु को हवा में मुक्त रूप से लटकाने (संतुलन में रखने) के लिए विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मान \( E = \frac{mg}{q} \) होना चाहिए।
(ऊपर की ओर लगने वाला विद्युत बल = नीचे की ओर लगने वाला गुरुत्वीय भार)
⑧ किसी वस्तु पर \( q \)-आवेश देकर \( k \)-गुणांक वाले किसी स्प्रिंग में बांधकर विद्युत क्षेत्र \( E \) में रख दी जाए तो स्प्रिंग में होने वाला फैलाव \( x = \frac{q \cdot E}{k} \) होता हैं। जहाँ \( k = \) स्प्रिंग गुणांक (Spring constant)
संतुलन की अवस्था में (At Equilibrium) :
⑨ \( m \)-द्रव्यमान वाले वस्तु को \( q \)-आवेश देकर रस्सी के सहारे विद्युत क्षेत्र \( E \) में स्वतंत्रता पूर्वक लटका दी जाए तो रस्सी में उत्पन्न तनाव बल का मान \( T = \sqrt{(qE)^{2} + (mg)^{2}} \) तथा विक्षेप कोण \( \theta = \tan^{-1}\left(\frac{qE}{mg}\right) \) होता हैं।
घटकों को वियोजित करने पर (Resolving into components) :
\( T \cos\theta = mg \) ————— ①
\( T \sin\theta = qE \) ————— ②
समीकरण ① एवं समीकरण ② को वर्ग करके जोड़ने पर —
\( (\because \sin^2\theta + \cos^2\theta = 1) \)
समीकरण ② में समीकरण ① से भाग करने पर (समी० ② / ① करने पर) —
* विद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electric Potential Energy) :-
किसी आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में जितना कार्य करना पड़ता हैं उसी के मान को उस आवेश का विद्युत स्थितिज ऊर्जा कहा जाता हैं।
📐 संपूर्ण गणितीय निगमन (Mathematical Derivation) :-
🚩 Important points :-
① \( U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_{0}}\cdot\frac{q_{1}q_{2}}{x} \) में \( q_{1} \) तथा \( q_{2} \) का मान चिन्ह के साथ (with sign) भरा जाता हैं।
(अर्थात् धनावेश के लिए \(+q\) एवं ऋणावेश के लिए \(-q\) लिखा जाता है।)
② इस सूत्र का उपयोग आवेशों के युग्म (Pairs) के लिए किया जाता हैं।
| No. of Particles (\( n \)) | No. of Pairs |
|---|---|
| 1 | No pairs (0) |
| 2 | 1 pair |
| 3 | 3 pairs |
| 4 | 6 pairs |
| 5 | 10 pairs |
| 6 | 15 pairs |
कुल युग्म = \( \frac{6(6-1)}{2} = \frac{30}{2} = 15 \)
③ संपूर्ण निकाय की कुल स्थितिज ऊर्जा:
④ यदि निकाय का स्थितिज ऊर्जा पूछे तो निकाय में बन रहे सभी संभव Pair (युग्मों) का स्थितिज ऊर्जा निकाल कर जोड़ दें।
(अर्थात् \( U_{\text{system}} = \sum U_{\text{pairs}} \))
⑤ किसी खास आवेश का स्थितिज ऊर्जा पूछे तो उस आवेश के साथ बनने वाले सभी Pair का स्थितिज ऊर्जा निकाल कर जोड़ दें।
* विद्युत विभव (Electric Potential) :-
किसी इकाई धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में जितना कार्य करना पड़ता हैं उसी के मान को उस बिंदु पर विद्युत विभव कहा जाता हैं।
📐 संपूर्ण गणितीय निगमन (Mathematical Derivation) :-
📊 Smart Table :-
(विद्युत बल, विद्युत क्षेत्र, स्थितिज ऊर्जा एवं विद्युत विभव का तुलनात्मक अध्ययन)
| बल एवं विद्युत क्षेत्र (\( x^2 \) पर निर्भर) | ऊर्जा एवं विद्युत विभव (\( x \) पर निर्भर) |
|---|---|
| $$ F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_{0}} \cdot \frac{q_{1}q_{2}}{x^{2}} $$ | $$ U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_{0}} \cdot \frac{q_{1}q_{2}}{x} $$ |
| $$ E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_{0}} \cdot \frac{q}{x^{2}} $$ | $$ V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_{0}} \cdot \frac{q}{x} $$ |
| $$ F = q \cdot E $$ | $$ U = q \cdot V $$ |
* विद्युत द्विध्रुव (Electric dipole) :-
समान परिमाण एवं विपरीत प्रकृति वाले दो आवेश एक-दूसरे से बहुत अल्प दूरी पर स्थित हों तो दोनों को एक साथ विद्युत द्विध्रुव कहा जाता हैं।
* विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण (Electric Dipole Moment) :-
विद्युत द्विध्रुव में किसी एक आवेश का परिमाण और आवेशों के बीच की दूरी के गुणनफल को विद्युत-आघूर्ण कहा जाता हैं।
→ इसे विद्युत द्विध्रुव भी कहा जाता हैं।
→ इसे \( p \) से सूचित किया जाता हैं।
→ विद्युत आघूर्ण एक सदिश राशि होता हैं, जिसकी दिशा ऋणावेश से धनावेश की ओर होती हैं।
* विद्युत द्विध्रुव के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक :-
माना कि \( q \)-आवेश वाले एक विद्युत द्विध्रुव हैं जिसमें आवेशों के बीच की दूरी \( d \) होने के कारण उसका विद्युत आघूर्ण \( p \) होता हैं।
→ CASE — A अक्षीय स्थिति या tan A स्थिति में विद्युत तिव्रता :-
द्विध्रुव के मध्य बिंदु \( O \) से अक्षीय रेखा पर स्थित किसी बिंदु \( P \) पर परिणामी विद्युत तीव्रता \( E_x \) ज्ञात करना।
📐 अक्षीय स्थिति में विद्युत तीव्रता का निगमन (Derivation) :-
📌 बहुत छोटे द्विध्रुव के लिए (यदि \( x \gg d \) हो, तो \( \frac{d^2}{4} \approx 0 \) मानने पर) :
→ CASE — B निरक्षीय स्थिति / tan B स्थिति में विद्युत क्षेत्र :-
द्विध्रुव के लम्ब-द्विभाजक (निरक्षीय रेखा) पर मध्य बिंदु \( O \) से \( x \) दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर परिणामी विद्युत तीव्रता ज्ञात करना।
📐 निरक्षीय स्थिति में विद्युत तीव्रता का निगमन (Derivation) :-
📌 बहुत छोटे द्विध्रुव के लिए (यदि \( x \gg d \) हो, तो \( \frac{d^2}{4} \approx 0 \) मानने पर) :
→ CASE — C किसी भी स्थिति में विद्युत क्षेत्र (Electric Field at Any Point) :-
माना कि विद्युत द्विध्रुव \( AB \) के मध्य बिंदु \( O \) से \( \theta \) कोण पर \( x \) दूरी पर कोई बिंदु स्थित है। यहाँ द्विध्रुव आघूर्ण \( \vec{p} \) को दो लम्बवत् घटकों में वियोजित करते हैं:
① रेखा की दिशा में अक्षीय घटक = \( p\cos\theta \)
② रेखा के लम्बवत् निरक्षीय घटक = \( p\sin\theta \)
📐 किसी भी स्थिति में परिणामी तीव्रता का निगमन (Derivation) :-
घटकों के मान :
चूँकि \( E_x \) और \( E_y \) परस्पर लम्बवत् (\( 90^\circ \)) हैं, अतः परिणामी तीव्रता :
📌 Important Points :-
① अक्षीय स्थिति में द्विध्रुव आघूर्ण \( \vec{p} \) और विद्युत क्षेत्र की तीव्रता \( \vec{E} \) दोनों समांतर (Parallel) होता हैं।
(अर्थात् दोनों के बीच कोण \( \theta = 0^\circ \) होता है।)
② निरक्षीय स्थिति में द्विध्रुव आघूर्ण \( \vec{p} \) और विद्युत क्षेत्र की तीव्रता \( \vec{E} \) दोनों Anti-parallel (विपरीत समानांतर) होता हैं।
(अर्थात् दोनों के बीच कोण \( \theta = 180^\circ \) होता है।)
③ अक्षीय स्थिति में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता निरक्षीय स्थिति का दो गुना होता हैं।
(सदिश रूप में ऋण चिन्ह (\(-\)) यह दर्शाता है कि निरक्षीय क्षेत्र की दिशा अक्षीय क्षेत्र के विपरीत है।)
④ किसी भी स्थिति में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मान :
Note :-
→ CASE — A : अक्षीय स्थिति के लिए \( \theta = 0^\circ \) होगा।
→ CASE — B : निरक्षीय स्थिति के लिए \( \theta = 90^\circ \) होगा।
* विद्युत द्विध्रुव के कारण विद्युत विभव का व्यंजक :-
माना कि \( q \)-परिमाण वाले एक विद्युत द्विध्रुव हैं जिसमें आवेशों के बीच की दूरी \( d \) होने के कारण विद्युत आघूर्ण \( p \) होता हैं जिसके केन्द्र से \( x \)-दूरी पर अक्षीय स्थिति में विद्युत विभव का मान \( V \) हैं।
→ CASE — A : अक्षीय स्थिति में विद्युत विभव :-
बिंदु \( P \) पर परिणामी विद्युत विभव दोनों आवेशों (\(+q\) तथा \(-q\)) के कारण विभव का अदिश योग होगा:
छोटे विद्युत द्विध्रुव के लिए (\( x \gg d \implies \frac{d^2}{4} \approx 0 \)):